Saturday, January 31, 2009

आईने के सौ टुकड़े

आईने के सौ टुकड़े, कर के हमने देखे हैं;
एक में भी तनहा थे, सौ में भी अकेले हैं

जो बना था एक साथी, वो भी हमसे छुठा है;
बेवफा नही जब वो, फिर क्यूँ हमसे रूठा है;
खोई खोई आँखों में, आंसुओं के मेले हैं;
एक में भी तनहा थे सौ में भी अकेले हें
आइने के सौ टुकड़े कर्के हमने देखे हें

उसका हाल क्या होगा, यह ही गम सताता है;
नींद भी नही आती, दर्द बढता जाता है;
ज़िन्दगी की राहों में, लोग हमसे खेले हैं;
एक में भी तनहा थे, सौ में भी अकेले हैं
आईने के सौ टुकड़े, कर के हमने देखे हैं

हर तरफ़ उजाला है, दिल में एक अँधेरा है;
सामने कब आएगा, क्यूँ छुपा सवेरा है;
मेरा दिल, जिगर देखो, कितने दर्द झेलें हैं;
एक में भी तनहा थे, सौ में भी अकेले हैं

आईने के सौ टुकड़े, कर के हमने देखे हैं
एक में भी तनहा थे, सौ में भी अकेले हैं

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